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अपनी सेवा करने में हमारी मदद करें

अपनी सेवा करने में हमारी मदद करें

प्रविष्‍टि की आयु

बीमा पॉलिसियों की प्रीमियमों के आकलन के लिए उम्र सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है. निम्नलिखित दस्तावेजों को आयु प्रमाणपत्र के रूप में स्वीकार किया जाता हैः

  • जन्म के समय तैयार किये गये निगम या स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड की प्रमाणित नकल.
  • बपतिस्मा प्रमाणपत्र या पारिवारिक बाइबिल की प्रमाणित नकल बशर्ते कि उसमें उम्र या जन्म तिथि का उल्लेख हो.
  • स्कूल-कालेज के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि बशर्ते कि उसमें उम्र या जन्मतिथि का उल्लेख हो.
  • सरकारी/ अर्द्धसरकारी संस्थाओं के कर्मचारियों का सेवा दस्तावेज या
  • भारत के पासपोर्ट अधिकारियों की जारी किया पासपोर्ट.
प्रीमियमों का भुगतान
  • शाखा कार्यालय पर नकद भुगतान, चेक से (बशर्ते कि खाते में राशि हो) या डिमांड ड्राफ्ट से.
  • डिमांड ड्राफ्ट, चेक या धनादेश डाक से भेजे जा सकते हैं.
  • आप हमारी किसी भी शाखा में प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं क्योंकि हमारी ९९ फीसदी शाखाएं आपस में जुड़ी हैं.
  • बहुत से बैंक आपके निर्देश पर प्रीमियमों का भुगतान कर देते हैं. इसलिए आप अपने बैंक को अपने खाते से प्रीमियम की रकम डेबिट करने का निर्देश देकर और अपनी पॉलिसी के बांड पर अंकित देय महीने की देय तिथि पर बैंकर का चेक भिजवा कर भी अपनी प्रीमियमें भर सकते हैं.
  • इंटरनेट के जरिये सेवा प्रदाताओं की मार्फ़त इंटरनेट से भी प्रीमियमों का भुगतान किया जा सकता है. हमारे अधिकृत सेवा प्रदाता हैं एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाइम्स आफ मनी, बिल जंक्शन, यूटीआई बैंक, बैंक आफ पंजाब, सिटी बैंक, कॉरपोरेशन बैंक,फेडरल बैंक और बिल डेस्क.
  • कॉरपोरेशन बैंक और यूटीआई बैंक के एटीएम से भी प्रीमियमें भरी जा सकती हैं.
  • इलेक्ट्रानिक क्लीयरिंग सर्विस के ज़रिये भी प्रीमियमें भरी जा सकती हैं. यह सेवा मुंबई,हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, नयी दिल्ली, कानपुर, बंगलौर, विजयवाड़ा, पटना, जयपुर,चंडीगढ़, त्रिवेंद्रम, अहमदाबाद, पुणे, गोवा और नागपुर, सिकंदाबाद और विशाखापत्तनम में शुरू की गयी है. किसी भी ऐसी बैंक का खातेदार पॉलिसी धारक, जो स्थानीय क्लीयरिंग हाउस का सदस्य है, प्रीमियम भुगतान के लिए ईसीएस डेबिट का उपयोग कर सकता है. इस प्रणाली का इस्तेमाल करने के इच्छुक पॉलिसी धारकों को हमारी शाखाओं/ मंडल कार्यालयों पर मिलने वाले मैंडेट फार्म भरने होते हैं और उसे बैंक से प्रमाणित कराना होता है. प्रमाणित मैंडेट फार्मों को हमारी शाखाओं/ मंडल कार्यालयों में जमा करना होता है.
  • इंडस्ट्रियल अश्योरेंस बिल्डिंग, चर्चगेट, न्यू इंडिया बिल्डिंग, सांताक्रूज़, जीवन शिखा बिल्डिंग बोरोवली पर लगी सिटी बैंक की छतरियां सिर्फ चेकों के जरिये प्रीमियमें जमा करने का काम करती हैं.
अनुकंपा दिन
  • पॉलिसी धारक को नियति तिथि पर प्रीमियमें भरनीं चाहिए. बहरहाल, वार्षिक, अर्द्धवार्षिक और तिमाही प्रीमियमों के भुगतान के लिए महीने भर (लेकिन ३० दिन से कम नहीं) की अनुकंपा अवधि प्रदान की जाती है. माहवार प्रीमियमों के भुगतान के लिए यह अवधि १५ दिन की होती है.
  • जब अनुकंपा अवधि रविवार या सार्वजनिक अवकाश दिवस पर खत्म होती है, तो पॉलिसी बहाल रखने के लिए उसके अगले दिन प्रीमियमें भरी जा सकती हैं.
  • अगर अनुकंपा अवधि के अंतिम दिन तक भी प्रीमियम नहीं भरी गयीं, तो पालिसी लैप्स हो जायेगी.
लैप्स पॉलिसी का पुनर्जीवीकरण
  • अगर पॉलिसी लैप्स हो गयी है, तो अदा न की गयी पहली प्रीमियम की देय तिथि से पांच साल के भीतर और भुगतान तिथि से पहले कुछ शर्तों पर बीमित व्यक्ति के जीवित रहते पांच साल के भीतर उसका नवीनीकरण कराया जा सकता है.
  • निगम पॉलिसी के नवीनीकरण के तीन विकल्प उपलब्ध कराता है, साधारण नवीनीकरण, विशेष नवीनीकरण और किस्तवार नवीनीकरण. पॉलिसियों का नवीनीकरण कर्ज सह नवीनीकरण और एसबी सह-नवीनीकरण योजनाओं के तहत भी कराया जा सकता है.
पते में परिवर्तन और पॉलिसी के दस्तावेजों का स्‍थानांतरण
  • पॉलिसी धारक को पॉलिसी सर्विसिंग शाखा को अविलंब अपने बदले हुए पते की सूचना देनी चाहिए. पता सही होने पर संपर्क करने में आसानी होती है और दावों के निपटारे में जल्दी होती है.
  • पॉलिसी धारक के अनुरोध पर उसकी पॉलिसी के दस्तावेज एक शाखा से दूसरी शाखा में स्थानांतरित किये जा सकते हैं.
पालिसी दस्तावेज का खो जाना
  • पॉलिसी दस्तावेज बीमित व्यक्ति और बीमा कर्त्ता के बीच का करार होते हैं. इसलिए पॉलिसी धारक को उसमें निहित रकम का निपटारा हो जाने तक पॉलिसी के बांड को सुरक्षित रखना चाहिए.
  • पॉलिसी के दस्तावेज गायब हो जाने पर उस शाखा को, जहां से वह जारी हुई है, अविलंब सूचना दी जानी चाहिए.
कर्ज
  • लागू पालिसियों पर उनके सरेंडर मूल्य के ९० प्रतिशत तक और चुकता पालिसियों के सरेंडर मूल्य के साथ-साथ उनसे जु ड़े बोनसों की रकम के ८५ प्रतिशत तक कर्ज की अनुमति दी जाती है. 
  • छह महीने से कम अवधि के लिए कर्ज नहीं दिये जाते. पालिसी के बांड के पिछले पन्ने पर लिखी गयी शर्तों और विशेषाधिकारों में इस बात का उल्लेख होता है कि किसी पालिसी को कर्ज सुविधा उपलब्ध है या नहीं.
पालिसी धारकों को राहत
  • पालिसी धारक के सूखे, तूफान, बा ढ़, भूकंप-जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होने पर निगम आम तौर पर प्रीमियमों के भुगतान, दावों के निपटारे, पालिसी की डुप्लीकेट प्रतियां मुहैया कराने के मामले में रिआयत देता है.
नामांकन
  • जीवन बीमा पालिसी धारक को अपनी मृत्यु पर पालिसी के दावा बनने की स्थिति में उसकी रकम लेने के लिए अपना उत्तराधिकारी नामजद करने का अधिकार होता है. नामित व्यक्ति को बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर पालिसी की रकम मिलने के सिवा कोई दूसरा लाभ नहीं मिलता. पालिसी धारक नामित व्यक्ति की सहमति के बिना कभी भी उसका नामांकन रद्द कर सकता है या अपना नामिनी बदल सकता है. पालिसी धारक को चाहिए कि वह अपने नामिनी के नाम का पालिसी में ही उल्लेख करे ताकि दावे के निपटारे में सहूलियत रहे.
हस्तांरण
  • हस्तांतरण का आशय है अधिकार, उपाधि और हित का हस्तांतरण. हस्तांतरण के बाद संबंधित संपत्ति के अधिकार, उपाधि और हित उस व्यक्ति के नाम पर चले जाते हैं जिसे उसका अधिन्यासी बनाया जाता है. और अधिन्यासी अधिन्यासन या हस्तांतरण में वर्णित शर्तों के तहत उस पालिसी का मालिक बन जाता है.
  • अधिन्यासन्‌ चरम हो सकता है और सशर्त भी. अधिन्यासन (एलआईसी के सिवा किसी और के नाप पर) के साथ नामांकन अपने- आप रद्द हो जाता है. इसलिए इस तरह की पालिसी के पुनर्‌अधिन्यासन के बाद पालिसी धारक को अपना नया नामिनी नियुक्त करना चाहिए ताकि दावे के निपटारे में विलंब न हो.
उत्तरजीविता लाभ/ परिपक्वता दावे
  • एलआईसी उत्तरजीविता लाभ/ परिपक्वता दावों का निपटारा नियति तिथि या उससे पहले ही कर देता है.
  • पालिसी बेचने वाला शाखा कार्यालय पालिसी धारक को भुगतान की बाबत काफी पहले ही सूचना भेज देता है और बीमित व्यक्ति द्वारा भुगतान लेने के लिए आवश्यक भुगतान वाउचर भेज देता है. अगर पालिसी धारक को सूचना नहीं मिलती तो उसे पालिसी संख्या बता कर संबंधित शाखा कार्यालय से संपर्क करना चाहिए.
  • 60,000 रुपये तक के उत्तरजीविता भुगतान पालिसी बांड या डिस्चार्ज वाउचर मांगे बिना ही कर दिये जाते हैं.
मृत्यु दावे
  • अगर पालिसी अवधि के भीतर ही बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु दावा ख ड़ा हो जाता है. पालिसी जारी करने वाले कार्यालय को निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ फौरन बीमा धारक की मृत्यु की सूचना दी जानी चाहिए:
    1. पालिसी/ पालिसियों का क्रमांक.
    2. पालिसी धारक का नाम.
    3. संबंधित व्यक्ति द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र.
    4. मृत्यु की तिथि.
    5. मृत्यु का कारण और
    6. मृतक के साथ दावेदार का संबंध.
  • मृत्यु की सूचना मिलने पर शाखा कार्यालय दावे के निपटारे की प्रक्रिया संबंधी निर्देशों के साथ दावेदार के पास भरने के लिए आवश्यक फार्म भेजता है.
  • तीन साल के बाद उठने वाले दावों को यनान-अरली' दावा माना जाता है और तमाम आवश्यक दस्तावेजों के मिलने के 30 दिन के भीतर उनका निपटारा कर दिया जाता है.
  • पालिसी जारी होने के दो साल के भीतर उठने वाले दावों को यअरलीक्लेम' माना जाता है और उनकी तफ्तीश अनिवार्य होती है.
  • दावे की रकम का भुगतान नामिनी/ एसाइनी या कानूनी वारिश को किया जाता है, जो भी दावेदार हो. बहरहाल, अगर पालिसी धारक ने पालिसी किसी को नामित न की हो. किसी को अधिन्यासी न बनाया हो या वसीयत करके पालिसी की रकम की बाबत उपयुक्त प्रावधान न किया हो तो पालिसी की रकम अदालती उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या इसी तरह के दूसरे दस्तावेज पेश करने वाले को देय होती है.
  • नगम कुछ योजनाओं के तहत दावे के उत्तराधिकार की भी अनुमति देता है, और मय ब्‍याज के मृत्यु की तिथि तक देय तमाम प्रीमियमों की रकम और पालिसी की अगली वर्षगांठ तक में देय प्रीमियमों की रकम काट कर दावे की रकम का भुगतान कर दिया जाता है. बशर्ते कि बीमित व्यक्ति की मृत्यु न भरी गयी पहली प्रीमियम की देय तिथि से छह महीने या साल-भर के भीतर हुई हो. साथ ही प्रीमियमें क्रमश कम से कम तीन साल या पांच साल तक भरी गयी हों.
दावा समीक्षा समित

निगम हर साल ब ड़ी तादाद में मृत्यु दावों का निपटारा करता है. जालसाजी करके महत्वपूर्ण सूचनाएं दबाने के मामलों में देनदारी के भुगतान से इनकार कर दिया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है कि ईमानदार पालिसी धारक के पैसे किसी जालसाज को न मिलने पायें. बहरहाल, अस्वीकृत मृत्यु दावों की तादाद बहुत कम होती है. ऐसे मामलों में भी दावेदार को अपना पक्ष संभागीय कार्यालय या केंद्रीय कार्यालय की समीक्षा समिति के सामने रखने का मौका दिया जाता है. इस समीक्षा के बाद हर मामले की साई को देखते हुए उपयुक्त फैसले किये जाते हैं. केंद्रीय/ संभागीय कार्यालय की दावा समीक्षा समित में हाईकोर्ट/जिला न्यायालय का एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश भी होता है. इससे हमारे कामकाज में पारदर्शिता आयी है और दावेदारों, पालिसी धारकों और आम जनता का हमारे प्रति विश्र्वास दृढ़ हुआ है और वह संतुष्ट रहते हैं.

बीमा लोकपाल
  • शिकायत निवारक मशीनरी को और व्यापक बनाते हुए भारत सरकार ने विभिन्न केंद्रों पर शिकायतों के निपटारे के लिए बीमा लोकपालों की नियुक्ति की है. फिलहाल देश भर में ऐसे 12 केंद्र चल रहे हैं.
  • बीमा लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में निम्नलिखित शिकायतें आती हैं
    1. बीमा कर्ता द्वारा किसी दावे का पूरी तरह या आशिंक रूप से अस्वीकार कर देना;
    2. पालसी की अवधि के दौरान देय भरी गयी प्रीमियम संबंधी विवाद;
    3. पालिसियों के गठन को लेकर कानूनी विवाद, बशर्ते कि वह विवाद पालिसी के भुगतान की बाबत हों;
    4. दावे के निपटारे में होने वाला विलंब;
    5. प्रीमियम का भुगतान मिलने के बाद भी ग्राहक को बीमा दस्तावेज न देना.
  • पालिसी धारक मु.फ्त में अपनी शिकायतों के समाधान के लिए बीमा लोक पाल का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
पालिसी सर्विसिंग के क्षेत्र में उठाये गये कदम
  • एलआईसी की तमाम 2048 शाखाएं पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हैं और पालिसी सर्विसिंग के काम करती हैं और नयी पालिसियां लाने, नवीनीकरण, पुनरुज्जीवन, कर्ज वगैरह से लेकर क्लेम दावों का निपटारा करने तक हर सेवा तत्परता से प्रदान करती हैं.
  • प्रस्तावों को तेजी से पूरा करने के लिए ग्रीन चैनेल सुविधा लायी गयी है.
  • सेवा प्रदाताओं के माध्यम से इंटरनेट के जरिये प्रीमियमों का भुगतान किया जा सकता है. ये सेवा प्रदाता हैं एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाइम्स आफ मनी, बिल जंक्शन, यूटीआई बैंक, बैंक आफ पंजाब, सिटी बैंक, कारपोरेशन बैंक, फेडरल बैंक, बिलडेस्क.
ग्रिवांस रीड्रेसल मशीनरी
  • निगम के तमाम कार्यालयों में ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र है. इनके मुखिया पदस्थ अधिकारी होते हैं जो संबंधित कार्यालयों में हर सोमवार के दिन सिवा छुट्टियों के दोपहर ढाई बजे से सा ढ़े चार बजे के बीच उपलब्ध होते हैं. ग्राहक अपनी शिकायतों के समाधान के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं.
  • नगम के विभिन्न कार्यालयों के पदस्थ अधिकारी हैं 
    शाखा कार्यालयों पर.....वरिष्ठ प्रबंधक 
    मंडल कार्यालयों पर ..... मार्केटिंग मैनेजर
    संभागीय कार्यालयों पर.... मंडल प्रबंधक (मार्केटिंग)
    केंद्रीय कार्यालय पर .... कार्यकारी निदेशक (मार्केटिंग/ आईओसीआरएम)
नागरिक चार्टर

नागरिक चार्टर नवंबर 1977 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था. उस चार्टर में ३० सेवा क्षेत्रों के लिए संदर्भिकाएं तय की गयी थीं.

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