मनी प्‍लस
 
लाभ
2. लाभ:
अ) मृत्‍यु लाभ:
मृत्‍यु लाभ के रूप में बड़ी बीमित रकम या पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य* उपलब्‍ध होगा. जोखिम प्रारंभ होने के पहले *बीमित की आयु 12 वर्ष से कम होने पर, पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य, मृत्‍यु के मामले में भुगतान योग्‍य होगा.
 
ब) परिपक्‍वता लाभ:
अनुबंध की परिपक्‍वता दिनांक तक बीमित की उत्तरजीविता पर, पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य के बराबर राशि देय है.
 
3. विकल्‍प:
अ) दुर्घटना लाभ विकल्‍प:
यदि आपकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, आप जीवन सुरक्षा के बराबर दुर्घटना लाभ अपना सकते हैं, जो न्‍यूनतम 25000 रु. से लेकर अधिकतम 50 लाख रु. (एलआईसी और अन्‍य बीमा कंपनियों से ली गयी सभी पॉलिसियों समेत.) हो सकता है. यह लाभ केवल पॉलिसी की वर्षगांठ, जिससे बीमित का 70 वां जन्‍मदिन निकटतम हो, पर उपलब्‍ध होगा. दुर्घटना मृत्‍यु के मामले में, दुर्घटना लाभ बीमित रकम के बराबर एक अतिरिक्‍त रकम देय होगी.
 
ब) गंभीर बीमारी लाभ राइडर:
यदि आपकी आयु 18 से 50 वर्ष के बीच है, आप जीवन सुरक्षा के बराबर गंभीर बीमारी लाभ अपना सकते हैं, जो न्‍यूनतम 50000 रु. से लेकर अधिकतम 10 लाख रु. (एलआईसी और अन्‍य बीमा कंपनियों से ली गयी सभी पॉलिसियों समेत.) हो सकता है, पॉलिसी अवधि 10 वर्ष या उससे अधिक पर उपलब्‍ध है. यह लाभ केवल पॉलिसी की वर्षगांठ, जिससे बीमित का 60 वां जन्‍मदिन निकटतम हो, पर उपलब्‍ध होगा. गंभीर बीमारी के अंतर्गत परिभाषित की गयी श्रेणियों के निदान के मामले में, कुछ नियमों और शर्तों के साथ, गंभीर बीमारी लाभ के बराबर एक अतिरिक्‍त रकम देय होगी.
 
पात्रता शर्तें और अन्‍य प्रतिबंध:
(अ) प्रवेश के समय न्‍यूनतम आयु 0 (पिछले जन्‍मदिन पर आयु)
(ब) प्रवेश के समय अधिकतम आयु 65 वर्ष (निकटतम जन्‍मदिन पर आयु)
(स) न्‍यूनतम परिपक्‍वता आयु 18 वर्ष (पूरे)
(द) अधिकतम परिपक्‍वता आयु 75 वर्ष (निकटतम जन्‍मदिन पर आयु)
(इ) न्‍यूनतम पॉलिसी अवधि 5 वर्ष
(फ़) अधिकतम पॉलिसी अवधि 30 वर्ष
(ग) न्‍यूनतम प्रीमियम 5,000 रु. प्रतिवर्ष
(ह) मूल योजना के अंतर्गत बीमित रकम न्‍यूनतम बीमित रकम: वार्षिक प्रीमियम का 5 गुना अधिकतम बीमित रकम : वार्षिक प्रीमियम का 30 गुना, यदि प्रवेश के समय आयु 45 वर्ष तक हो. वार्षिक प्रीमियम का 20 गुना, यदि प्रवेश के समय आयु 46 से 60 वर्ष तक हो.
वार्षिक प्रीमियम का 10 गुना, यदि प्रवेश के समय आयु 61 वर्ष और अधिक हो.
 
जहां न्‍यूनतम बीमित रकम 5000 रु. के गुणकों में नहीं है, वहां इसे 5000 रु. के अगले संपूर्णांक पर रोक दिया जायेगा
 
कम आयु का होने के मामले में जोखिम की शुरुआत: जोखिम की शुरुआत पॉलिसी शुरु होने की दिनांक से 2 वर्ष बाद से या प्रवेश के समय बीमित की उम्र 10 वर्ष या उससे कम होने की स्‍थिति में पॉलिसी की वर्षगांठ के साथ ही या उसके तुरंत बाद बीमिति की आयु 7 वर्ष पूरे, जो भी बाद में हो, के साथ होती है. जहां प्रवेश के समय उम्र 10 वर्ष से अधिक, पर 12 वर्ष से कम हो, जोखिम बीमित के 12 वें जन्‍मदिन पर या उसके साथ ही पड़ने वाली पॉलिसी की वर्षगांठ के साथ शुरु होता है. 12 वर्ष या उससे अधिक आयु के नाबालिग के मामले में जोखिम तुरंत शुरु हो जायेगा.
 
5. निधि का निवेश: यूनिटों की ख़रीदी के लिये आवंटित प्रीमियमों का निवेश पूरी गंभीरता से कई निर्धारित निधि प्रकारों के निवेश नमूनों के अनुरूप ही होगा. कई प्रकार की निधि और उनके निवेश नमूने निम्‍नानुसार होंगे:
 
निधि प्रकार शासकीय/ शासकीय ज़मानती सुरक्षाएं / कॉर्पोरेट ऋण में निवेश पूंजी बाज़ार उपकरण जैसा लघु-अवधि निवेश सूचीबद्ध इक्‍विटी शेयरों में निवेश जोखिम/ प्राप्ति के लिये निधि का उद्देश्‍य और विवरण
बॉन्‍ड निधि 60% से कम नहीं 40% से अधिक नहीं कुछ नहीं निम्‍न जोखिम
सुरक्षित निधि 45% से कम नहीं 40% से अधिक नहीं 15% से कम नहीं और
55%से अधिक नहीं
स्‍थिर आय - निम्‍नतम से मध्‍यम जोखिम
संतुलित निधि 30% से कम नहीं 40% से अधिक नहीं 30% से कम नहीं और
70%से अधिक नहीं
संतुलित आय और वृद्धि - मध्‍यम जोखिम
वृद्धि निधि 20% से कम नहीं 40% से अधिक नहीं 40% से कम नहीं और
80%से अधिक नहीं
दीर्घ अवधि पूंजी वृद्धि – अधिकतम जोखिम
 
पॉलिसीधारक के पास उपर्युक्‍त 4 निधियों में से कोई भी एक चुनने का विकल्‍प है.
 
6. यूनिट मूल्‍य की गणना का प्रकार: यूनिटें संबद्ध निधि के शुद्ध संपत्ति मूल्‍य (एनएवी) के आधार पर आवंटन की दिनांक को आवंटित की जायेंगी. यहां कोई निमंत्रण प्रस्‍ताव नहीं है (यूनिटों के निमंत्रण मूल्‍य और प्रस्‍ताव मूल्‍य दोनों एनएवी के समान होंगे). एनएवी की गणना नियमित आधार पर होगी और यह निवेश प्रदर्शन पर आधारित होगा, निधि प्रबंधन शुल्‍क और प्रत्‍येक निधि प्रकार के अंतर्गत निधि विस्‍तार या स्थिरता पा रही है, इसकी गणना निम्‍नानुसार होगी:
 
विनियोग मूल्‍य लागू (जब निधि विस्‍तार पर हो):
निवेश का बाज़ार मूल्‍य, मूल्‍यांकन दिनांक पर मौज़ूदा यूनिटों की संख्‍या में से, निधि के साथ संपत्ति की ख़रीदी में लगा व्‍यय, किसी नयी संपत्ति का मूल्‍य, निधि प्रबंधन शुल्‍कों से हुयी कोई अर्जित आय जोड़कर और किसी नये दायित्‍व के मूल्‍य, प्रावधान, यदि हों, आदि को घटाकर निकाला जाता है (किसी भी यूनिट के मुक्‍त होने से पहले ).
 
ज़ब्‍ती मूल्‍य लागू है (जब निधि स्‍थिर हो):
निवेश का बाज़ार मूल्‍य, मूल्‍यांकन दिनांक पर मौज़ूदा यूनिटों की संख्‍या में से, निधि में से संपत्ति के विक्रय में लगा व्‍यय घटाकर, किसी नयी संपत्ति का मूल्‍य, निधि प्रबंधन शुल्‍कों से हुयी कोई अर्जित आय जोड़कर और किसी नये दायित्‍व के मूल्‍य, प्रावधान, यदि हों, आदि को घटाकर निकाला जाता है (किसी भी यूनिट के मुक्‍त होने से पहले ).
 
शुद्ध संपत्ति मूल्‍य (एनएवी ) का लागू होना:
एक विशेष समय पर (वर्तमान में दोपहर 3 बजे )निगम की सेवारत शाखा द्वारा ईसीएस या स्‍थानीय चेक या डिमांड ड्राफ़्ट द्वारा प्रीमियम प्राप्‍त करने पर, जिस स्‍थान पर प्रीमियम प्राप्‍त किया गया है, उस दिन बंद होने वाला एनएवी, जिस पर प्रीमियम प्राप्‍त किया गया है, लागू होगा. इस समय के बाद, निगम की सेवारत शाखा द्वारा ईसीएस या स्‍थानीय चेक या डिमांड ड्राफ़्ट द्वारा प्रीमियम प्राप्‍त करने पर, जिस स्‍थान पर प्रीमियम प्राप्‍त किया गया है, अगले व्‍यापार दिन पर बंद होने वाला एनएवी लागू होगा.
इसी तरह, समर्पण के लिये प्राप्‍त वैध आवेदनों, आंशिक निकासी, मृत्‍यु दावा, परिवर्तन आदि के संबंध में इस समय के बाद, निगम की सेवारत शाखा में उस दिन पर बंद होने वाला एनएवी लागू होगा. इस निश्‍चित समय के बाद, समर्पण के लिये प्राप्‍त वैध आवेदनों, आंशिक निकासी, मृत्‍यु दावा, परिवर्तन आदि के संबंध में इस समय के बाद, निगम की सेवारत शाखा में अगले व्‍यापार दिन पर लगने वाला एनएवी लागू होगा.
 
परिपक्‍वता दावे के संबंध में, परिपक्‍वता दिनांक का एनएवी लागू होगा.
 
दिया गया समय मौज़ूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार है और आईआरडीए के निर्देशों के अनुरूप परिवर्तित होगा.
 
7. योजना के अंतर्गत शुल्‍क:
अ) प्रीमियम आवंटन शुल्‍क: यह प्राप्त प्रीमियम से शुल्‍कों के अनुरूप प्रीमियम कटौती का प्रतिशत है. शेष प्रीमियम का वह भाग बनाता है, जो पॉलिसी के लिये यूनिटों की ख़रीदी (निवेश) के उपयोग में आता है. आवंटन शुल्‍क निम्‍नानुसार हैं:
 
प्रीमियम बंध (प्रतिवर्ष) आवंटन शुल्‍क
  प्रथम वर्ष 2रा और 3रा वर्ष उसके बाद
5,000 से 75,000 26.50% 5.00% 2.50%
75,001 से 1,50,000 25.50% 5.00% 2.50%
1,50,001 से 3,00,000 24.00% 5.00% 2.50%
3,00,001 और अधिक 23.00% 5.00% 2.50%
 
ब) जोखिम सुरक्षा के लिये शुल्‍क:
1) मृत्‍यु शुल्‍क – यह जीवन बीमा सुरक्षा की कीमत है, जो आयु के अनुसार निर्धारित है और हर महीने ली जायेगी. जीवन बीमा सुरक्षा, मूल योजना के अंतर्गत बीमित रकम और सभी शुल्‍कों की कटौती के बाद निधि मूल्‍य का अंतर होता है.
 
एक स्‍वस्थ जीवन के संदर्भ में कुछ आयु वर्गों के लिये प्रति 1000 रु. जीवन बीमा सुरक्षा पर शुल्‍क निम्‍नानुसार हैं:
 
आयु 25 35 45 55
रु. 1.42 1.73 3.89 10.76
 
2) गंभीर बीमारी लाभ राइडर शुल्‍क – यह गंभीर बीमारी लाभ राइडर है (यदि अपनाया गया हो). ये आयु के अनुसार निर्धारित हैं और हर महीने लिये जायेंगे.
 
एक स्‍वस्थ जीवन के संदर्भ में कुछ आयु वर्गों के लिये प्रति 1000 रु. गंभीर बीमारी लाभ राइडर पर प्रति वर्ष शुल्‍क निम्‍नानुसार हैं:
 
आयु 0.91 1.80 5.31 14.44
रु. 0.91 1.80 5.31 14.44
 
3) दुर्घटना लाभ शुल्‍क- यह दुर्घटना लाभ राइडर की कीमत है (यदि अपनाया गया हो) और प्रत्‍येक महीने में प्रति हज़ार रु. दुर्घटना लाभ बीमित रकम पर 0. 50 की दर से प्रत्‍येक पॉलिसी वर्ष में लगाया जायेगा.
 
स) अन्‍य शुल्‍क:
 
1)पॉलिसी प्रशासन शुल्‍क - पहले पॉलिसी वर्ष के दौरान प्रत्‍येक महीने 60 रु., दूसरे वर्ष के दौरान प्रत्‍येक महीने 20 रु. और उसके बाद, तीसरे वर्ष से पॉलिसी अवधि समाप्‍त होने तक 3% प्रति वर्ष की तीव्रता के साथ प्रत्‍येक महीने 20 रु.
 
2) निधि प्रबंधन शुल्‍क –यह शुल्‍क निम्‍नांकित दरों पर यूनिटों की कीमत के प्रतिशत के अनुसार लगाया जाता है:
 
“बॉन्‍ड” निधि के लिये यूनिट निधि का 0.60% प्रति वर्ष
“सुरक्षित” निधि के लिये यूनिट निधि का 0.80% प्रति वर्ष
“संतुलित” निधि के लिये यूनिट निधि का 1.00% प्रति वर्ष
“वृद्धि” निधि के लिये यूनिट निधि का 1.20% p.a. प्रति वर्ष
 
3) परिवर्तन शुल्‍क– यह शुल्‍क धन के एक निधि से दूसरी में परिवर्तन पर लगाया जाता है. एक पॉलिसी वर्ष के दौरान निशुल्‍क रूप से 4 परिवर्तन करने की अनुमति दी जाती है. इसके अतिरिक्‍त उस वर्ष में किये गये हर परिवर्तन पर परिवर्तन शुल्‍क 100 रु. होगा.
 
4) निमंत्रण/ प्रस्‍ताव विस्‍तार – कुछ नहीं.
 
5) समर्पण शुल्‍क – कुछ नहीं.
 
6) सेवा कर शुल्‍क – निम्‍नांकित शुल्‍कों पर एक सेवा कर शुल्‍क, यदि हो, लगाया जायेगा.
 
अ) पॉलिसी प्रशासन, मृत्‍यु, दुर्घटना लाभ और गंभीर बीमारी लाभ राइडर, यदि हो- पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य से मासिक आधार पर पर्याप्‍त संख्‍या में यूनिटों के निरस्‍तीकरण के द्वारा जैसे और जब अनुकूल पॉलिसी प्रशासन, मृत्‍यु, दुर्घटना लाभ और गंभीर बीमारी लाभ राइडर शुल्‍क कटौती हो.

ब) प्रीमियम आवंटन- आवंटन के समय

स) निधि प्रबंधन- निधि प्रबंध शुल्‍क की कटौती के समय

द) परिवर्तन- प्रभावी परिवर्तन के समय और

ई) बदलाव ( विविध शुल्‍क के अंतर्गत उपलब्‍ध कराया गया) - पॉलिसी में बदलाव की दिनांक पर

इस शुल्‍क का स्‍तर समय- समय पर लागू होने वाले सेवाकर की दर के अनुसार होगा. वर्तमान में, सेवा कर की दर 3% शिक्षा उपकर के साथ 12% और इस तरह प्रभावी दर 12.36% है.

 
7) विविध शुल्‍क- यह शुल्‍क अनुबंध में किसी बदलाव के लिये लगाया जाता है, जैसे पॉलिसी अवधि में कमी, प्रीमियम प्रकार में परिवर्तन आदि. किसी भी बदलाव पर 50 रु. का शुल्‍क की अनुमति हो सकती है.
 
द) शुल्‍कों के पुनरावलोकन का अधिकार: निगम प्रीमियम आवंटन और मृत्‍यु शुल्‍क को छोड़कर उपर्युक्‍त सभी या किन्‍हीं शुल्‍कों के पुनरावलोकन का अधिकार सुरक्षित रखता है. शुल्‍कों में परिवर्तन

आईआरडीए के प्राथमिक अनुमोदन के बाद प्रभावी होगा.

यद्यपि शुल्‍क पुनरावलोकन योग्‍य हैं, वे निम्नांकित अधिकतम सीमा का विषय होंगे:

- पॉलिसी प्रशासन शुल्क

पहले पॉलिसी वर्ष के दौरान प्रत्‍येक महीने 150 रु., दूसरे वर्ष के दौरान प्रत्‍येक महीने 50 रु. और उसके बाद, तीसरे वर्ष से पॉलिसी अवधि समाप्‍त होने तक 3% प्रति वर्ष की तीव्रता के साथ प्रत्‍येक महीने 50 रु.

- निधि प्रबंधन शुल्‍क: प्रत्‍येक निधि के लिये अधिकतम निम्‍नानुसार होंगे:

  1. बॉन्‍ड निधि:    यूनिट निधि का 1.20% प्रतिवर्ष
  2. सुरक्षित निधि:  यूनिट निधि का 1.60% प्रतिवर्ष
  3. संतुलित निधि:  यूनिट निधि का 2.00% प्रतिवर्ष
  4. वृद्धि निधि:    यूनिट निधि का 2.40% प्रतिवर्ष

- गंभीर बीमारी लाभ शुल्‍कों को वर्तमान दर के 200% से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकेगा.

- परिवर्तन शुल्‍क को प्रति परिवर्तन 200 रु. से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकेगा.

- विविध शुल्‍क को प्रत्येक समय पर, जब किसी बदलाव का अनुरोध हो, 100 रु. से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकेगा.

पॉलिसीधारक के अपने शुल्‍कों के पुनरावलोकन से सहमत ना होने के मामले में, उसके पास उसके निधि मूल्‍य की निकासी का विकल्‍प रहेगा.

8. समर्पण:
समर्पण मूल्‍य, यदि है, पॉलिसी की तीसरी वर्षगांठ के पूरा होने पर ही भुगतानयोग्‍य है. समर्पण की दिनांक पर, पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य ही समर्पण मूल्‍य होगा. इसमें कोई समर्पण शुल्‍क नहीं होगा.
 
यदि आप पॉलिसी की शुरुआत की दिनांक से 3 वर्ष के अंदर समर्पण के लिये आवेदन करते हैं, तो पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य मौद्रिक शर्तों में परिवर्तित हो जायेगा. इसके बाद कोई भी शुल्‍क नहीं लगाये जायेंगे और यह मौद्रिक राशि पॉलिसी के शुरु होने की दिनांक से 3 वर्ष पूरे होने पर देय होगी.
 
समर्पण की दिनांक के बाद, लेकिन पॉलिसी की शुरुआत के 3 वर्ष पूरे होने से पहले ही बीमित की मृत्‍यु हो जाने के मामले में, 3 वर्ष पूरे होने पर देय मौद्रिक मूल्‍य नामित/ वैध उत्तराधिकारी को मृत्‍यु पर तुरंत ही देय होगा.
 
अनिवार्य समर्पण :
निम्‍नांकित मामलों में पॉलिसी अनिवार्य रूप से समर्पित होगी:
 
1) जहां पुनर्जीवन अवधि के दौरान पॉलिसी पुनर्जीवित नहीं की जाती या पॉलिसीधारक पुनर्जीवन अवधि के बाद सुरक्षा को जारी रखने को चुनाव नहीं करता (जहां कम से कम 3 वर्ष के प्रीमियम का भुगतान कर दिया गया हो), पॉलिसी के शुरुआत के तीन वर्ष पूरे होने के बाद या पुनर्जीवन काल समाप्‍त होने पर, जो भी बाद में हो, पॉलिसी समाप्‍त हो जायेगी. बहरहाल, यदि परिपक्‍वता की दिनांक पुनर्जीविता अवधि की समाप्‍ति से पहले आती है, तो पॉलिसी परिपक्‍वता की दिनांक पर समाप्‍त होगी.

2) जहां प्रीमियम भुगतान 3 वर्ष से कम समय तक किया गया हो और पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य संबद्ध शुल्‍कों की वसूली के लिये पर्याप्‍त ना हो,

3) जहां प्रीमियमें कम से कम 3 वर्ष तक भरी गयी हों और पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य का शेष एक वार्षिकी प्रीमियम से कम बचा हो.

पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य मौद्रिक मूल्‍य में निम्‍नानुसार परिवर्तित होगा:

समर्पण के लिये आवेदन की दिनांक पर या जब पुनर्जीवन अवधि समाप्‍त हो गई हो (अनिवार्य समर्पण के मामले में), एनएवी का, उस दिनांक पर पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य की यूनिटों की संख्‍या से गुणा करने पर मौद्रिक राशि ज्ञात होगी.

9. अन्‍य विशेषताएं:
 
1) आंशिक निकासियां: आप निम्‍नांकित विषयों के अनुसार पॉलिसी की तीसरी वर्षगांठ के बाद यूनिटों का आंशिक रूप से नकदीकरण कर सकते हैं:
  1. नाबालिगों के संदर्भ में, आंशिक निकासियों की अनुमति बीमित के बालिग होने के साथ पड़ने वाली पॉलिसी की वर्षगांठ या उसके बाद से (18 वे जन्‍मदिन पर या उसके बाद) होगी.
  2. आंशिक निकासियां निश्‍चित राशि या यूनिटों की निश्‍चित संख्‍या के रूप में हो सकती हैं.
  3. निकासी की दिनांक से 2 वर्ष की अवधि के लिये, मूल योजना के अंतर्गत बीमित रकम, आंशिक निकासियों की राशि के विस्‍तार तक घटा दी जायेगी.
  4. नियमित प्रीमियम पॉलिसियों के अंतर्गत, जहां प्रीमियमें 3 वर्षों से कम भरी गयी हों और बाकी प्रीमियमें भरी ही ना गयी हों, आंशिक निकासियों की अनुमति नहीं होगी.
  5. नियमित प्रीमियम पॉलिसियों के अंतर्गत, जहां कम से कम 3 वर्षों तक प्रीमियमों का भुगतान किया गया हो, पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य में न्‍यूनतम दो वार्षिकी प्रीमियमों के बकाया रहने पर आंशिक निकासी की अनुमति होगी.
2)परिवर्तन: आप पॉलिसी अवधि के दौरान परिवर्तन शुल्‍कों के साथ, यदि हों, पूरे निधि मूल्‍य के लिये किसी भी निधि प्रकार में परिवर्तन कर सकते हैं.
 
3) जोखिम सुरक्षाओं की वृद्धि/ कमी: योजना के अंतर्गत सुरक्षाओ में वृद्धि की अनुमति नहीं होगी. बहरहाल, पॉलिसी अवधि के दौरान एक निश्‍चित सीमा में आप किन्‍हीं या सभी जोखिम सुरक्षाओं को कम सकते हैं, जोकि आपके द्वारा योजना के अंतर्गत सभी प्रीमियमों का भुगतान कर देने पर उपलब्‍ध कराया जाता है. सुरक्षा का घटा हुआ स्‍तर उपर्युक्‍त पैरा 4 में उपलब्‍ध निश्‍चित सीमाओं पर उपलब्‍ध होगा. इसके अलावा, एक बार जोखिम सुरक्षा में कमी की अनुमति हो जाने पर, उसी में बाद में वृद्धि/ प्रत्‍यावर्तन नहीं किया जा सकता.
 
4) पुनर्जीवन अवधि के बाद सुरक्षा जारी रखने का विकल्‍प : अगर पॉलिसी के अंतर्गत कम से कम तीन वर्ष तक प्रीमियमों का भुगतान किया गया है, तो पुनर्जीवन अवधि में पॉलिसी को पुनर्जीवित ना किये जाने और कोई अन्‍य प्रीमियमों का भुगतान ना किये जाने के बावज़ूद पॉलिसीधारक सुरक्षा को जारी रखने का विकल्‍प अपना सकता है. यह विकल्‍प पुनर्जीवन अवधि के पूरा होने के कम से कम एक महीना पहले अभ्‍यास में लाने की ज़रूरत होती है.अगर यह विकल्‍प उपलब्‍ध कराया जाता है, तो पॉलिसी निधि से संबद्ध शुल्‍कों की कटौती के द्वारा पॉलिसी के अंतर्गत सुरक्षा जारी रहेगी.पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य एक वार्षिकी प्रीमियम तक पहुंचने तक यह विकल्‍प जारी रहेगा. पुनर्जीवन अवधि के समाप्‍त होने के बाद कोई भी अन्‍य प्रीमियमों के भुगतान की अनुमति नहीं रहेगी.
 
5) प्रीमियमों की समाप्‍ति : यदि प्रीमियमों का भुगतान वार्षिक, अर्द्धवार्षिक, त्रैमासिक या मासिक (ईसीएस) रूप से किया जाता है और पॉलिसी के अंतर्गत अनुकंपा के दिनों के अंदर यदि इनका भुगतान नहीं किया जाता, तो पॉलिसी रद्द हो जायेगी. एक रद्द पॉलिसी पहली भुगतान ना की गयी प्रीमियम की निर्धारित दिनांक से दो साल की अवधि के दौरान पुनर्जीवित की जा सकती है.
 
1) जहां कम से कम 3 वर्ष की प्रीमियमों का भुगतान किया जा चुका हो, वहां जीवन सुरक्षा, दुर्घटना लाभ और गंभीर बीमारी राइडर, यदि हों, पुनर्जीवन अवधि के दौरान जारी रहेंगे.
 
इस अवधि के दौरान, मृत्यु, दुर्घटना लाभ और/ या गंभीर बीमारी सुरक्षा शुल्‍क, यदि हों, तो उन्‍हें पॉलिसीधारक के निधि मूल्य से हर महीने उचित संख्‍या में यूनिटों के निरस्‍तीकरण द्वारा, अन्‍य शुल्‍कों के अतिरिक्‍त लिया जायेगा. यह निम्‍न के लिये संबद्ध जोखिम सुरक्षाओं को जारी रखेगा:
 
1. पहली भुगतान ना की गयी प्रीमियम की निर्धारित दिनांक से दो वर्ष, या
2. परिपक्‍वता की दिनांक तक, या
3. उस अवधि तक, जबकि पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य एक वार्षिकी प्रीमियम तक घट जाये,
जो भी पहले हो.
 
इसके अलावा, पुनर्जीवन अवधि में पॉलिसी को पुनर्जीवित ना किये जाने और कोई अन्‍य प्रीमियमों का भुगतान ना किये जाने के बावज़ूद पॉलिसीधारक सुरक्षा को जारी रखने का विकल्‍प अपना सकता है. यह विकल्‍प पुनर्जीवन अवधि के पूरा होने के कम से कम एक महीना पहले अभ्‍यास में लाने की ज़रूरत होती है.अगर यह विकल्‍प उपलब्‍ध कराया जाता है, तो पॉलिसी निधि से संबद्ध शुल्‍कों की कटौती के द्वारा पॉलिसी के अंतर्गत सुरक्षा जारी रहेगी.पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य एक वार्षिकी प्रीमियम तक पहुंचने तक यह विकल्‍प जारी रहेगा. पुनर्जीवन अवधि के समाप्‍त होने के बाद कोई भी अन्‍य प्रीमियमों के भुगतान की अनुमति नहीं रहेगी.
 
इस अवधि के दौरान पॉलिसी के अंतर्गत विभिन्‍न आकस्मिक व्‍ययों में देय लाभ निम्‍नानुसार होंगे:
 
(अ) मृत्‍यु के मामले में: मूल योजना के अंतर्गत बीमित रकम या पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य का अधिकतम. बीमित रकम ली गयी आंशिक निकासियों, यदि हैं, के प्रावधान का मामला होंगी.
 
(ब) दुर्घटना में हुयी मृत्‍यु के मामले में: यदि दुर्घटना लाभ अपनाया गया है, तो उपर्युक्‍त अ के अंतर्गत राशि के अतिरिक्‍त, दुर्घटना लाभ बीमित रकम
 
(स) गंभीर बीमारी दावे के मामले में: गंभीर बीमारी राइडर बीमित रकम, यदि विकल्‍प लिया गया है.
 
(द) परिपक्‍वता पर: पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य
 
(ई) समर्पण के मामले में (अनिवार्य समर्पण समेत): पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य. बहरहाल, समर्पण मूल्‍य का भुगतान 3 पॉलिसी वर्ष पूरे होने के बाद ही किया जायेगा.
 
(फ़) आंशिक निकासी के मामले में: निकासी की दिनांक से 2 वर्षों की अवधि के लिये, मूल योजना के अंतर्गत बीमित रकम, की गयी आंशिक निकासी की राशि के विस्‍तार तक कम कर दी जायेगी.
 
2) जहां 3 वर्षों के प्रीमियम भुगतान के बिना पॉलिसी रद्द हो जाती है, जीवन सुरक्षा, दुर्घटना लाभ/ गंभीर बीमारी राइडर सुरक्षाएं, यदि हैं, समाप्‍त हो जायेंगी और इन लाभों के लिये कोई शुल्‍क नहीं काटा जायेगा. बहरहाल, अन्‍य शुल्‍कों की कटौती जारी रहेगी. किसी रद्द पॉलिसी के अंतर्गत देय लाभ निम्‍नानुसार हैं:
 
(ग) मृत्‍यु के मामले में: पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य.
 
(ह) दुर्घटना के चलते हुयी मृत्‍यु के मामले में: केवल ग के अंतर्गत राशि
 
(ई) गंभीर बीमारी दावा मामले में: कुछ नहीं
 
(ज) समर्पण के मामले में (अनिवार्य समर्पण समेत): पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य/ मौद्रिक मूल्‍य, जैसा भी मामला हो, तीन पॉलिसी वर्षगांठ पूरे होने पर देय होगा. पॉलिसी शुरू होने के 3 वर्षों के अंदर कोई भी राशि भुगतान योग्‍य नहीं होगी .
 
(क) आंशिक निकासी के मामले में: पॉलिसी के 3 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद ही आंशिक निकासी की अनुमति होगी.
 
5) पुनर्जीवीकरण: यदि बकाया प्रीमियमों का भुगतान अनुकंपा दिनों के अंदर नहीं किया जाता है, तो पॉलिसी रद्द हो जाती है. कोई रद्द पॉलिसी पहली भुगतान ना की गयी प्रीमियम की निर्धारित दिनांक से दो वर्ष के दौरान या परिपक्‍वता से पहले, जो भी पहले हो, पुनर्जीवित की जा सकती है. वह अवधि, जिसके दौरान पॉलिसी का पुनर्जीवित किया जा सकता है “पुनर्जीवन की अवधि” या “पुनर्जीवन अवधि” कहलाती है.
 
यदि कम से कम 3 पूरे वर्षों तक प्रीमियमों का भुगतान नहीं किया गया है, तो पहली भुगतान ना की गयी दिनांक से दो वर्ष के अंदर पॉलिसी पुनर्जीवित की जा सकती है. पुनर्जीवीकरण निगम की संतुष्‍टि के लिये पॉलिसी जारी रखने का प्रमाणपत्र जमा करने और सभी बकाया प्रीमियमों का बिना ब्‍याज भुगतान करने के बाद होगा.
 
यदि कम से कम 3 पूरे वर्षों तक प्रीमियमों का भुगतान किया गया है और उसके बाद की प्रीमियमों का भुगतान नहीं किया गया है, तो पहली भुगतान ना की गयी दिनांक से दो वर्ष के अंदर, लेकिन परिपक्‍वता की दिनांक से पहले पॉलिसी पुनर्जीवित की जा सकती है.इसमें बीमा जारी रखने के प्रमाण की ज़रूरत नहीं होगी और सभी बकाया प्रीमियमों का बिना ब्‍याज भुगतान करने की ज़रूरत होगी.
 
निगम अपनी शर्तों पर पुनर्जीवन को स्‍वीकार करने या रद्द पॉलिसी के पुनर्जीवन को अस्‍वीकार करने का अधिकार सुरक्षित रखता है. किसी रद्द पॉलिसी का पुनर्जीवीकरण केवल निगम के अनुमोदन के बाद ही प्रभावी होगा और इसकी लिखित सूचना विशेष रूप से पॉलिसीधारक को दे दी जायेगी.
 
उपर्युक्‍त कथन का विचार किये बिना, यदि प्रीमियम भुगतान 3 वर्षों से कम किया गया है और पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य शुल्‍कों की वसूली के लिये पर्याप्‍त नहीं है, पॉलिसी रद्द कर दी जायेगी और इसके बाद पुनर्जीवीकरण उपलब्‍ध नहीं होगा. यदि 3 वर्षों या 3 वर्ष से अधिक समय तक प्रीमियम भुगतान किया गया हो और पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य एक वार्षिकी प्रीमियम तक घट गया हो, तो पॉलिसी रद्द कर दी जायेगी और उस दिनांक तक का पॉलिसीधारक का निधि मूल्‍य बीमित का लौटा दिया जायेगा और इसके बाद पुनर्जीवन की अनुमति नहीं होगी.
 
(6) बंदोबस्‍त विकल्‍प: जब पॉलिसी परिपक्‍वता के लिये आती है, आप “बंदोबस्‍त विकल्‍प” का अभ्‍यास कर सकते हैं और परिपक्‍वता की दिनांक से पॉलिसी के धन को अधिकतम 5 वर्षों की अवधि तक किश्‍तों में प्राप्‍त कर सकते हैं. इस अवधि के दौरान कोई जीवन सुरक्षा नहीं होगी. निश्‍चित दिनांक पर देय किश्‍तों का मूल्‍य निवेश जोखिम का विषय होगा. एनएवी का बढ़ना या घटना निधि के प्रदर्शन पर आधारित होगा.
 
10. पुन: स्‍थापन :
कोई पॉलिसी एक बार समर्पित होने के बाद पुन:स्‍थापित नहीं की जा सकती.
 
11. पॉलिसीधारक द्वारा जोखिमों का वहन:
  1. एलआईसी का मनी प्‍लस- I यूनिट से जुड़ा एक बीमा उत्‍पाद है, जो परंपरागत बीमा उत्‍पादों से अलग है और जोखिम कारकों का विषय है.
  2. यूनिट से जुड़ी जीवन बीमा पॉलिसियों में भुगतान की गयी प्रीमियमें पूंजी बाज़ार से संबद्ध निवेश जोखिम का विषय हैं और यूनिटों का एनएवी बढ़ता या घटता रहता है, जो पूंजी बाज़ार को प्रभावित करने वाले कारकों और निधि के प्रदर्शन पर आधारित होता है और अपने निर्णयों के लिये बीमित स्‍वयं ज़िम्‍मदार होता है.
  3. भारतीय जीवन बीमा निगम केवल एक बीमा कंपनी का नाम है और एलआईसी की मनी प्‍लस- I केवल एक यूनिट से जुड़ा बीमा अनुबंध है और किसी भी तरह से अनुबंध की गुणवत्ता, इसकी भावी अवधारणा और प्राप्‍तियों को सूचित नहीं करता है.
  4. अपने बीमा अभिकर्ता या मध्‍यस्‍थ या बीमा कंपनी के पॉलिसी दस्‍तावेजों से कृपया संबद्ध जोखिमों और लागू शुल्‍कों के बारे में जानें.
  5. इस अनुबंध के अंतर्गत प्रस्‍तावित कई निधियां, निधियों के केवल नाम हैं और किसी भी तरह से इन योजनाओं, उनके भविष्‍य और प्राप्‍तियों की गुणवत्ता को सूचित नहीं करते.
  6. पॉलिसी के अंतर्गत सभी लाभ समय समय पर लागू होने वाले कर कानूनों और अन्‍य वित्तीय अधिनियमितियों का भी विषय हैं.
12. कूलिंग ऑफ़ अवधि: यदि आप पॉलिसी “नियमों और शर्तों” से सहमत नहीं हैं, तो आप 15 दिन के अंदर हमें पॉलिसी लौटा सकते हैं.कूलिंग ऑफ़ अवधि के अंदर पॉलिसी लौटाए जाने के मामले में लौटाई जाने वाली राशि निम्‍नानुसार निश्‍चित की जायेगी:
पॉलिसीधारक की निधि में यूनिटों का मूल्य
 
जुड़ेगा   अनावंटित प्रीमियम
जुड़ेगा   पॉलिसी प्रशासन शुल्‍क कटौती
घटेगा   मूल योजना के अंतर्गत प्रति हज़ार बीमित रकम पर 0.20 रु. शुल्‍क
घटेगा   चिकित्‍सकीय परीक्षण और विशेष रिपोर्ट्स, यदि हों, की यथार्थ कीमत
 
13. कर्ज़ :
इस योजना के अंतर्गत कोई कर्ज़ उपलब्‍ध नहीं होगा.
 
14. नियत कार्य:
इस योजना के अंतर्गत नियत कार्य की अनुमति होगी.
 
15. निवारण:
पहले वर्ष के अंदर किसी भी समय बीमित द्वारा आत्‍महत्‍या कर लेने के मामले में, निगम पॉलिसीधारक के निधि मूल्‍य के विस्‍तार के अलावा पॉलिसी के प्रभाव के संबंध में किसी दावे पर विचार नहीं करेगा.