- यह उदाहरण धूम्रपान न करने वाले पुरुष मानक जीवन (चिकित्सा, जीवनशैली और व्यवसाय की दृष्टि से) पर लागू होता है
- उपर्युक्त उदाहरण में गैर गारंटीशुदा हित लाभों (1) तथा (2) की गणना इसप्रकार की गई है कि वे क्रमशः 6 प्रतिशत प्रति वर्ष (स्थिति 1) और 10 प्रतिशत प्रति वर्ष (स्थति 2) के प्रतिफल के कल्पना की प्रक्षेपित निवेश दर के साथ संगत हों. अर्थात्, इस हितलाभ उदाहरण को तैयार करने में यह माना गया है कि LIC पॉलिसी की सारी अवधि के दौरान प्रतिफल की जो प्रक्षेपित निवेश दर अर्जित कर पाएगा, वह यथा स्थिति, 6 प्रतिशत प्रति वर्ष या 10 प्रतिशत प्रति वर्ष होगी. प्रतिफल की प्रक्षेपित निवेश दर गारंटीशुदा नहीं है.
- उदाहरण का मुख्य उद्देश्य यह है कि ग्राहक परिमाणन के कुल स्तर के भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में उत्पाद की विशेषताओं और लाभों के प्रवाह को समझ सके.
- LIC ने अपने अभिकर्ताओं/मध्यस्थों, कर्मचारियों तथा अधिकारियों को “यूलिप” निधि की भावी निष्पादकता पर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार नहीं दिया है, सिवाय 6 प्रतिशत तथा 10 प्रतिशत वृद्धि की दृष्टांकित दर का.
- यदि कम से कम तीन वर्ष के प्रीमियमों का भुगतान कर दिया गया है, तो तीसरे वर्ष के उपरांत आवासीय चिकित्सा हितलाभ का दावा किया जा सकता है.
- बृहद अस्पताल नकद हितलाभ का दावा 365 दिनों के लिए किया जा सकता है.
- अधिकतम बृहत शल्यक्रिया का दावा बीमित रकम के तिगुने तक किया जा सकता है.
विशेषताएँ - विस्तृत
वैधानिक चेतावनी
““कुछ हितलाभ गारंटीशुदा हैं और कुछ हितलाभ जीवन बीमा कंपनी की भावी कार्य-निष्पादकता के आधार पर अर्जित लाभ के अनुसार परिवर्तनशील हैं.
यदि आपकी पॉलिसी गारंटीशुदा लाभ देती है तो इस पृष्ठ पर उदाहरण तालिका में वे स्पष्ट रूप से “गारंटीशुदा“ अंकित होंगे. यदि आपकी पॉलिसी परिवर्तनशील लाभ देती है तो इस पृष्ठ पर उदाहरणों में कल्पित निवेश लाभों की दो भिन्न दरें दर्शायी जाएंगी. लाभ की ये कल्पित दरें गारंटीशुदा नहीं है और वे आपको मिल सकने वाले लाभ की उच्च अथवा निम्न सीमाएं नहीं हैं क्योंकि आपकी पॉलिसी का मूल्य अनेक तत्वों पर निर्भर करता है, जिसमें भावी निवेश निष्पादकता भी सम्मिलित है.”
”
बीमा अधिनियम 1938 की धारा 41
(1) भारत में कोई भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी व्यक्ति को जीवन अथवा जोखिम संबंधी बीमा लेने, नवीकरण करने अथवा उसे जारी रखने के लिए प्रलोभन हेतु अथवा देय कमीशन का पूर्ण अथवा आंशिक भाग अथवा पॉलिसी में वर्णित प्रीमियम पर कोई छूट नहीं दे सकता सिवाय उस छूट के जो बीमाकर्ता के विवरण पत्र अथवा सूची में प्रकाशित है: बशर्ते बीमा अभिकर्ता द्वारा स्वयं के जीवन पर स्वयं द्वारा ली गई जीवन बीमा पॉलिसी से संबंधित कमीशन की प्राप्ति को इस उपधारा के अंतर्गत प्रीमियम में छूट की स्वीकृति नहीं माना जाएगा, यदि बीमाकर्ता द्वारा ऐसी स्वीकृति निर्धारित शर्तों की संतुष्टि करती है जिसमें यह बताया गया है कि वह बीमाकर्ता द्वारा नियुक्त एक वास्तविक बीमा अभिकर्ता है.
(2) इस धारा के प्रावधानों के कार्यान्वयन का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को दंडित किया जाएगा यह दंड पांच सौ रुपये तक हो सकता है.
बीमा अधिनियम 1938 की धारा 45 – निर्विवादता खंड
बीमाकर्ता द्वारा जीवन बीमा की किसी भी पॉलिसी पर जारी होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि पूरी होने के उपरांत इस आधार पर स्पष्टीकरण नहीं मांगा जाएगा कि प्रस्ताव में बीमा लेने हेतु दिया गया कोई विवरण अथवा स्वास्थ्य परीक्षक या रेफरी बीमाकर्ता के मित्र की रिपोर्ट अथवा पॉलिसी जारी करने में सहायक कोई दस्तावेज गलत अथवा असत्य सूचना पर आधारित या बशर्तें बीमाकर्ता यह बताए कि वह विवरण महत्वपूर्ण तथ्य से संबंधित था अथवा छिपाए गए तथ्यों को बताना महत्वपूर्ण था तथा पॉलिसीधारक द्वारा इसे बताने में छल-कपट का प्रयोग किया गया और ऐसा करते हुए पॉलिसीधारक यह जानता था कि वह विवरण असत्य है तथा इसमें ऐसे तथ्यों को छुपाया गया, जिन्हें बताना महत्वपूर्ण था.
टिप्पणी:महत्वपूर्ण से अभिप्राय सभी आवश्यक तथा प्रासंगिक जानकारी से है, जिसमें निगम जोखिम की बीमा सुरक्षा का बीमांकन करता है.
टिप्पणी: कौन सी शर्तें लागू होती हैं, कृपया इस संबंध में पॉलिसी दस्तावेज देखें या हमारे निकटतम शाखा कार्यालय से संपर्क करें.