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समूह सेवा निवृत्ति योजना
आज एक संस्थान, न केवल सक्षम एवं प्रशिक्षित विभाग सहित विभिन्न पदों वाले लोग रखता है बल्कि ऐसा वातावरण भी बनाता है जहां वे अपना सर्वोत्तम दे सकें और बेहतरी का अहसास, पूर्णता व सुरक्षा की अनुभूति पा सकें तथा संस्थान के साथ अपने लगातार सहयोग में गर्व कर सकें. कुछ लोगों के लिए पेंशन का प्रबंध संस्थान में बने रहने और संस्थान को अपना सर्वोत्तम दे सकने के लिए एक आकर्षण हो सकता है, क्योंकि आयु में सतत वृद्धि के साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद एक नियमित आय एक आवश्यकता बन जाती है. कर्मचारियों को पेंशन हितलाभ प्रदान करने के लिए, एक नियोक्ता के पास आयकर नियम १९६२ के नियम ८९ के प्रावधानों के तहत दो विकल्प हैं.
1. निजी स्तर पर प्रबंधित ट्रस्ट कोष का गटन करना और जब एक सदस्य सेवानिवृत्त होता है, तो उक्त सेवानिवृत्त सदस्य को पेंशन देने के लिए एलआईसी से वार्षिकी को खरीदना.
2. बीमित से उसकी सामूहिक सेवानिवृत्ति योजना खरीद कर पेशन कोष के प्रबंधन को सौंपना.
एलआईसी द्वारा प्रबंधित पेंशन कोष के लाभ:
एलआईसी द्वारा प्रबंधित पेंशन कोष के निम्नांकित अतिरिक्त व विशेष लाभ हैं
1. कोष पर एक आकर्षक एवं प्रतियोगितापूर्ण संप्राप्ति कोष खाते में जमा होगी.
2. तरलता की समस्या का स्वतह्न विलय एलआईसी द्वारा प्रबंधित कोष में यथाशीघ्र हो जाता है.
3. हमारे द्वारा प्रशासित फंडों का हम समय समय पर निह्नशुल्क बीमांकक मूल्यांकन करते हैं.
4. हमारे द्वारा कोष का प्रशासन वैज्ञानिक ढंग से चलाया जाता है तथा दावे समुचित रूप से पूरे किये जाते हैं.
5. सदस्य की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर एक आकर्षक धनराशि (एकमुश्त रकम) देने के लिए संस्थान बहुत कम लागत पर सामूहिक बीमा सहित सामूहिक सेवानिवृत्ति योजना ले सकते हैं
एलआईसी द्वारा प्रदत्त सेवानिवृत्ति योजना
नियोक्ता प्रत्येक सदस्य के वेतन का एक निश्चित प्रतिशत का अनुदान करते हैं. ऐसे अनुदानों का एलआईसी द्वारा संचय किया जाता है तथा जमा धनराशि का उपयोग निम्नलिखित रूप में विभिन्न हितलाभों को देने में किया जाता है.
हितलाभ:
सेवानिवृत्ति पर
एक सदस्य की सेवानिवृत्ति पर, संचय (ब्याज सहित अंशदान) का उपयोग उसके चयन के अनुसार पेंशन देने में किया जाता है.
मृत्यु होने पर
पेंशन हिताधिकारी के जीवन में देय होता है. संचय का उपयोग हिताधिकारी जो ढंग चुनता है उसी के अनुसार पेंशन का भुगतान करने में किया जाता है तथा प्राप्त हितलाभ कर मुक्त होता है. मृत्यु की स्थिति में पेंशन के अलावा एकमुश्त धनराशि देय है, यदि नियोक्ता ने सामूहिक बीमा योजना सहित सामूहित सेवानिवृत्ति योजना ले रखा है.
धनवापिसी (विदड्रावल) पर:
वह न्यायोचित ब्याज को नये नियोक्ता की सेवानिवृत्ति योजना में स्थानांतरित करा सकता है अथवा तुरंत ले सकता है या पेंशन में विलंबित कर सकता है.
एलआईसी द्वारा प्रदत्त पेंशन विकल्प:
1) मृत्यु पर्यन्त आजीवन पेंशन.
2) पूंजी वापिसी सहित आजीवन पेंशन तथा मृत्यु पर समूह पेंशन टर्मिनल बोनस.
3) 5,10,15 अथवा 20 वर्षों एवं उसके बाद के जीवन के लिए जमानती आजीवन पेंशन.
4) कर्मचारी और उसके पति/पत्नी में से अंतिम जीवित को देय संयुक्त आजीवन पेंशन.
5) कर्मचारी और उसके पति/पत्नी में से अंतिम जीवित को देय संयुक्त आजीवन पेंशन जिसमें अंतिम जीवित की मृत्यु पर पूंजी वापिसी शामिल होती है. इच्छा होने पर, पेंशन का एक तिहाई भाग स्वामित्व पर लिया जा सकता है.
योग्यता की शर्तें:
नियोक्ता के द्वारा अपने सभी कर्मचारियों को पेंशन देना बाध्यकर या सांविधिक नहीं है. यह निर्णय पूरी तरह उसी पर निर्भर है कि वह कर्मचारियों के किस वर्ग/वर्गों को योजना में शामिल करने की इच्छा रखता है. योग्यता शर्तें पद अथवा वेतन के आधार पर परिभाषित की जा सकती हैं. (यद्यपि, एक बार श्रेणियों का वर्गीकरण हो जाने के बाद, नियोक्ता कर्मचारियों के बीच अंतर नहीं कर सकता तथा समान रूप से योजना को विस्तारित करता है).
अंशदान:
अधिकतम वार्षिक अंशदान जो एक नियोक्ता पेंशन कोष तथा प्रोविडेंट कोष में जमा करता है आयकर प्रावधानों के द्वारा प्रतिबंधित वार्षिक वेतन (बेसिक और डी.ए.) का २७% है. वार्षिक अंशदानों को छूट योग्य व्यावसायिक खर्चों की तरह माना जाता है.
अंशदान का भुगतान कौन करता है?
अधिकांशतह्न नियोक्ता अंशदान करता है, परंतु इच्छित होने पर, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों अंशदान कर सकते हैं, इस स्थिति में योजना को कंटिब्यूटरी पेंशन कोष योजना कहा जाता है.
कर हितलाभ:
अनुमोदित सेवानिवृत्ति योजना से संबंधित प्रावधान आयकर अधिनियम,1961 की चौथी योजना के भाग 'बी' तथा आयकर नियम, 1962 के भाग ुळळळ में दिये गए हैं. आयकर कटौती केवल तभी उपलब्ध होगी यदि योजना सीआईटी द्वारा अनुमोदित है.
1. आयकर अधिनियम के खंड 36(1) (र्ळीं) की शर्तों में वार्षिक अंशदान को कटौतीयोग्य व्यावसायिक व्यय की तरह माना गया है.
2. प्रत्यक्ष करों के केंद्रीय बोर्ड द्वारा जारी अधिसूचना की शर्तों में पिछले सेवा दायित्व के मद्देनजर अंशदान (ओं) का .80% हिस्सा कटौतीयोग्य व्यावसायिक व्यय की तरह माना जाता है जो भुगतान के अनुगामी वर्षों में फैला दिया जाता है.
3. कर्मचारी का अंशदान, कंट्रीब्यूशन योजना की स्थिति में आयकर अधिनियम के खंड 80सी के तहत छूट की अहर्ता (योग्यता) पा लेता है.
सेवानिवृत्ति योजना सहित सामूहिक बीमा योजना:
सामूहिक सेवानिवृत्ति योजना के सदस्यों को सेवानिवृत्ति योजना सहित सामूहिक बीमा के तहत संरक्षा दी जा सकती है ताकि विशेष परिस्थितियों के कारण सेवा के दौरान मृत्यु जोखिम संरक्षा दी जा सके.
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