ई.डी.एल.आइ
 
कर्मचारियों की बचत बीमा (ईडीएलआई) योजना, 1976 के स्‍थान पर समूह बीमा योजना
ई.डी.एल.आई. क्या है ?

कर्मचारियों की बचत बीमा (ईडीएलआई) योजना, 1976 के स्‍थान पर समूह बीमा योजना

उन तमाम नियोक्ताओं के लिये, जिन पर कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम लागू होता है, कर्मचारी बचत बीमा योजना 1976 के अंतर्गत अपने कर्मचारियों को जीवन बीमा के लाभ उपलब्ध कराने के लिये अंशदान करना अनिवार्य होता है. 24 जून 2000 को संशोधित योजना के अंतर्गत बीमा लाभ भविष्यनिधि में पिछले बारह महीनों के दौरान मृत कर्मचारी के खाते में औसत शेष राशि के बराबर होता है. यदि किसी कर्मचारी के नाम पर भविष्य निधि में 35000 रु. से अधिक राशि जमा है, तो बीमा लाभ 35000 रु. और इससे अधिक राशि का 25% देय होगा, परंतु कुल बीमा दावा भुगतान किसी भी स्थिति में 60000 रु. ही अधिकतम हो सकता है. लिहाज़ा अगर संबंधित कर्मचारी की सेवावधि पर्याप्त नहीं है अथवा उसकी आय कम है, तो औसत जमा राशि काफी कम होगी और उसके परिवारवालों को या तो अपर्याप्त लाभ मिलता है या मिलता ही नहीं है.

नियोक्ता को अपने हर कर्मचारी की आय की 0.5 प्रतिशत राशि अंशदान के रूप में भविष्यनिधि अधिकारियों को देनी होती है।

बेहतर विकल्प:

यदि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को वैकल्‍पिक योजनाओं के ज़रिये बेहतर बीमा लाभ उपलब्ध कराता है, तो उसे अधिनियम के अनुच्छेद 17 ( 2 ए ) के अंतर्गत भविष्य निधि में अंशदान करने के दायित्व से मुक्त किया जा सकता है. ई.डी.एल.आई. की जगह एल.आई.सी. समूह बीमा योजना को बेहतर विकल्प के रूप में स्वीकार किया गया है.

नियोक्ता को लाभ:

  1. नियोक्ता जितना प्रीमियम का भुगतान करता है, वह आर.पी.एफ.सी. में उसके अंशदान की राशि से कम होता है. विशेषकर तब, जब कर्मचारियों की आय अधिक और समूह की औसत आयु कम होती है.
  2. दावे का निपटारा जल्दी होता है, क्योंकि दावे के भुगतान के लिये एलआईसी को केवल मृत्यु प्रमाणपत्र और नियोक्ता की ओर से दावा प्रपत्र देने की आवश्यकता होती है.
  3. आय कर के मामले में नियोक्ता द्वारा भरी गयी प्रीमियम की राशि को सामान्य व्यापारिक व्यय माना जाता है.

कर्मचारियों को लाभ:

कर्मचारियों को उनकी आय और सेवा की अवधि के आधार पर पांच हजार से दो लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलती है, उनकी भविष्य निधि में कितनी राशि जमा है, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता अथवा फिर हर कर्मचारी/ मजदूर को समूह के आकार के आधार पर एक समान बीमित रकम देने का निर्णय लिया जाता है.

दुर्घटना लाभ:

अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करने पर बीमित रकम को बढ़ाकर दोहरे दुर्घटना लाभ की अनुमति दी जा सकती है.

योजना लागू करने की प्रक्रिया

  1. कर्मचारियों की जानकारी के लिये इस आशय का नोटिस जारी करें कि ई.डी.एल.आई. की जगह एलआईसी की योजना खरीदने जा रहे हैं.
  2. ई.पी.एफ. के अनुच्छेद 17 ( 2 ए) और म. प्र. अधिनियम 1952 के अंतर्गत क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के यहां ई.डी.एल.आई. योजना छोड़ने के लिये आवेदन करें. आवेदन पत्र के साथ प्रस्तावित समूह बीमा योजना के नियमों सहित वांछित दस्तावेज लगायें. केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने आर.पी.एफ.सी. को उस महीने के पहले दिन से इस तरह की छूट देने का अधिकार दे रखा है, जिस महीने में इस छूट के लिये आवेदन किया जाता है। इस तरह की छूट हासिल करने में एलआईसी भी नियोक्ताओं का मार्गदर्शन करता है।