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एलआईसी गोल्‍डन जुबली फ़ाउंडेशन

एलआईसी एक ज़िम्‍मेदार सामाजिक नागरिक के रूप में समय- समय पर अपने सामाजिक दायित्‍वों का निर्वहन करता रहा है. वास्‍तव में हमारे अधिकांश निवेश औद्योगिक विकास, अधोसंरचना विकास और राष्‍ट्रीय विकास को गति प्रदान करते हैं.

हम देश के विभिन्‍न भागों में सामाजिक कार्यों/ समुदायों को विभिन्‍न राशियां दान करते रहे हैं. साथ ही हमने प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, सुनामी इत्‍यादि में पीड़ितों की सहायता के लिये प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय राहत कोष, विभिन्‍न राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री राहत कोष सहित राजीव गाँधी फ़ाउंडेशन में अपना योगदान दिया है.

हमारे सामाजिक उत्तरदायित्‍वों को संगठित करने और उन्‍हें एक औपचारिक आकार देने के लिये हमने 'एलआईसी गोल्‍डन जुबली फ़ाउंडेशन' नाम से एक सार्वजनिक ट्रस्‍ट का गठन किया है.

गोल्‍डन जुबली फ़ाउंडेशन के मुख्‍य उद्देश्‍य हैं:
  1. गरीबी या आपदा से राहत
  2. शिक्षा की उन्‍नति
  3. चिकित्‍सकीय राहत
  4. अन्‍य सामान्‍य जन उपयोगी उद्देश्‍यों की प्रगति
कॉर्पोरेट घरानों की भूमिका में एक महत्‍वपूर्ण विकास उनके कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्‍वों पर बढ़ता फ़ोकस रहा है. कॉर्पोरेट का सामाजिक दायित्‍व व्यापार के द्वारा प्रतिबद्धता रखते हुये नैतिकतापूर्ण व्‍यवहार करना और आर्थिक विकास के साथ ही श्रमबल की गुणवत्ता में सुधार के साथ विस्‍तृत परिप्रेक्ष्‍य में स्‍थानीय समुदाय और समाज में सहयोग देना है.

भारतीय कंपनियों के लिये कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्‍व (सीएसआर) की अवधारणा नयी नहीं है. हालांकि, भारत में कॉर्पोरेट्स ने जिस तरीके से इसे लिया है और इन प्रोजेक्‍ट्स के क्रियान्‍वयन में कर्मचारियों का जो प्रत्‍यक्ष योगदान रहा है, वह नया है. बहुत से संस्‍थानों के समर्पित विभाग किसी एकल समय वाले प्रोजेक्‍ट्स में सम्मिलित होने या उसमें केवल निवेश करने के अलावा भी रूचि रखे हुये हैं.

सीएसआर गतिविधियों के अपने लाभ हैं. ये लाभ अच्‍छी छवि बनाने, कर्मचारियों के सामाजिक योगदानों को प्रोत्‍साहित करने से संबंधित हैं, जो क्रमिक रूप से संगठन के प्रति ईमानदारी की भावना का विकास करते हैं. सीएसआर गतिविधियां कर्मचारियों को संगठन से एक टीम के रूप में जोड़ने में मदद करती हैं, जो ऐसे समर्पित कर्मियों के निर्माण में मदद देती हैं, जो उसके नियोक्‍ता का गौरव होते हैं.

हालांकि, इन गतिविधियों के बड़े लाभों में से एक, कर्मचारियों के बीच आंतरिक ब्रांड का निर्माण होना है. ऐसी गतिविधियों में भाग लेने से कर्मचारी गर्व का अनुभव करते हैं. इसके अलावा, व्‍यस्‍ततापूर्ण कार्य के बीच ये गतिविधियां कर्मचारियों का तनाव दूर करने में मदद करती हैं और उन्‍हें ज्‍़यादा जुड़ाव रखने वाला और जागरूक व्‍यक्‍ति बनाती हैं.

फ़ाउंडेशन का निर्माण प्रारंभिक तौर पर 50 करोड़ रु. की राशि द्वारा इस प्रावधान के साथ किया गया था कि अगले पांच वर्षों में इस संग्रह को 100 करोड़ तक पहुंचाने के लिये हर वर्ष इसमें 10 करोड़ रु. डाले जायेंगे.

फ़ाउंडेशन, मुंबई चैरिटी आयुक्‍त द्वारा पंजीकृत किया जा चुका है और आयकर की धारा 80G के तहत हमें छूट भी प्राप्‍त हुई है.

सभी मंडलों को ऐसे प्रस्‍तावों को भेजने का सुझाव दिया गया है, जो ऊपर बताये गये उद्देश्‍यों के दायरे में आते हैं.

क्षेत्रों के लिये चुनी गयी गतिविधियों की योजना इस तरह बनायी जायेगी, जो अधिकतम कर्मचारी भागीदारी और योगदान को प्रोत्‍साहित करती हो.

एलआईसी 1 लाख से अधिक कर्मचारियों और 11 लाख अभिकर्ताओं के साथ भारत के बड़े परिवारों में से एक है. हमारा भौगोलिक फैलाव और पहुंच बढ़ती जा रही है. हमारा ब्रांड तत्‍काल विश्‍वास की भावना को जागृत करता है. गोल्‍डन जुबली फ़ाउंडेशन कॉर्पोरेट स्‍तर पर हमारे सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व और व्‍यक्‍तिगत स्‍तर पर धर्मार्थ कार्यों को पूर्ण करने की राह उपलब्‍ध कराता है.


उद्देश्‍य
  1. गरीबी या आपदा से राहत
  2. शिक्षा की उन्‍नति
  3. चिकित्‍सकीय राहत
  4. अन्‍य सामान्‍य जन उपयोगी उद्देश्‍यों की प्रगति

ट्रस्‍टीज़

निम्‍नलिखित एलआईसी गोल्‍डन जुबली फ़ाउंडेशन बोर्ड के सदस्‍य हैं.

  1. श्री टी.एस. विजयन अध्‍यक्ष
  2. श्री डी.के.मेहरोत्रा ट्रस्‍टी
  3. श्री थॉमस मैथ्‍यू टी. ट्रस्‍टी
  4. श्री ए.के.दासगुप्‍ता ट्रस्‍टी
  5. श्री जे.एफ.रिबेरो ट्रस्‍टी 1987 में पद्मभूषण प्राप्‍तकर्ता
  6. श्रीमती सुधा मूर्ति ट्रस्‍टी 2005 में पद्मश्री अवार्ड प्राप्‍तकर्ता
  7. श्री माधव लक्ष्मण आप्टे ट्रस्टी पूर्व टेस्ट क्रिकेटर
  8. श्री पॉल जॉर्ज UNESCO की "Asia-Pacific Region for Heritage Conservation" अवार्ड से सम्मानित